Seema Gyan Pareeksha (सीमा ज्ञान परीक्षा)
9. सीमाजन एवं सीमा जागरण मंच का परिचय और इतिहास
भारत की सीमाएँ केवल मानचित्र पर अंकित रेखाएँ नहीं हैं; उनके साथ बसे गाँव, समुदाय, परम्पराएँ और जीवन-पद्धतियाँ मिलकर राष्ट्र का जीवंत सीमांत बनाती हैं। इन क्षेत्रों में निवास करने वाले नागरिक—सीमाजन—अपनी स्थानीय जानकारी, सजगता, राष्ट्रनिष्ठा और सुरक्षा बलों के साथ सहयोग के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा की महत्त्वपूर्ण नागरिक शक्ति हैं। सीमा जागरण मंच का प्रमुख उद्देश्य सीमाजन में राष्ट्रीय चेतना जगाकर उसे सीमा की सुरक्षा, सीमांत विकास और राष्ट्र की एकता के लिए संगठित करना है। घुसपैठ, आतंकवाद, तस्करी, मानव-व्यापार, मादक पदार्थों एवं हथियारों के अवैध आवागमन, जनसांख्यिकीय असंतुलन और समुद्री सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के प्रति जन-सतर्कता का निर्माण इसके कार्य का महत्त्वपूर्ण भाग है। इसके साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, सांस्कृतिक संरक्षण और ग्राम-विकास के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों को सक्षम एवं जीवंत बनाए रखना भी संगठन का उद्देश्य है। राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में 1983–84 के प्रवास और ग्राम-सर्वेक्षणों से विकसित यह प्रयास 31 मार्च 1985 को जोधपुर में सीमा-जन कल्याण समिति राजस्थान के विधिवत उद्घाटन के साथ संगठित रूप में सामने आया। यही कार्य आगे चलकर सीमा जागरण मंच तथा विभिन्न प्रादेशिक संगठनों के माध्यम से देश के स्थलीय और समुद्री सीमावर्ती क्षेत्रों तक विस्तृत हुआ। इसका ध्येय सजग सीमाजन, सुरक्षित सीमा और समर्थ भारत का निर्माण करना है।
Chapters
अध्याय 9.1 सीमाजन की अवधारणा एवं सीमा-सुरक्षा में भूमिका
सीमाजन का अर्थ, सीमावर्ती समाज की विशेषताएँ, सीमा-बोध तथा सीमावर्ती नागरिकों की राष्ट्रीय भूमिका। स्थानीय सूचना, सामाजिक सतर्कता, संदिग्ध गतिविधियों के प्रति जागरूकता तथा सुरक्षा बलों और प्रशासन के साथ सीमाजन के सहयोग का महत्त्व।
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अध्याय 9.2 सीमाजन कल्याण समिति राजस्थान का उद्भव एवं स्थापना
वर्ष 1983–84 के सीमांत प्रवास और ग्राम-सर्वेक्षण, 30 अक्टूबर 1984 की जयपुर बैठक तथा बालासाहब देवरस, सोहन सिंह और लक्ष्मण सिंह शेखावत की भूमिका। 31 मार्च 1985 का जोधपुर उद्घाटन सम्मेलन, 750 प्रतिनिधियों की सहभागिता, प्रथम कार्यकारिणी, पंजीकरण और प्रारम्भिक सुरक्षा-संबंधी सर्वेक्षण एवं ज्ञापन।
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अध्याय 9.3 सीमा जागरण मंच के उद्देश्य एवं कार्यपद्धति
सीमा-सुरक्षा के प्रति जन-जागरण, राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के विरुद्ध सामाजिक सतर्कता तथा स्थलीय, समुद्री और आकाशीय सीमाओं के प्रति राष्ट्रीय चेतना। सुरक्षा बलों, प्रशासन और समाज के बीच सहयोग के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, सांस्कृतिक एकता और समग्र सीमांत विकास पर आधारित कार्यपद्धति।
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अध्याय 9.4 देशव्यापी विस्तार एवं प्रादेशिक संगठन
देश की भिन्न-भिन्न भौगोलिक सीमाओं के अनुरूप सीमा जागरण कार्य का विस्तार। सीमा जागरण मंच, सीमाजन कल्याण समिति, सीमान्त चेतना मंच, सरहदी लोक सेवा समिति तथा समुद्री क्षेत्रों में कार्यरत सागरीय सीमा मंच, करावली कल्याण परिषद्, समुद्र भारती और अन्य प्रादेशिक संगठनों का परिचय।
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अध्याय 9.5 सुरक्षा-जागरण, प्रमुख अभियान एवं सेवा-कार्य
सीमा-सुरक्षा से संबंधित जनसंवाद, ग्राम-संपर्क, सर्वेक्षण, जन-जागरूकता और सुरक्षा बलों के साथ सामाजिक आत्मीयता के कार्यक्रम। सरहद को प्रणाम, सीमा दर्शन यात्रा, रक्षाबंधन, भारत माता पूजन, सीमा संवाद, सीमा विमर्श और मंथन के साथ छात्रावास, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, शोध, प्रकाशन और युवा सहभागिता।
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